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निजी हैसियत से शीर्ष कोर्ट पहुंचे सेनाध्यक्षDate: Jan 17, 2012 सरकार जिस अनहोनी से बचने की कोशिश कर रही थी आखिर वह हो ही गई। सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की जन्मतिथि पर उनके और रक्षा मंत्रालय के बीच चल रही खींचतान फाइलों और बयानों से निकलकर सोमवार को अदालत पहुंच गई। आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सेनाध्यक्ष बनाम भारत सरकार का मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा है। मामले ने जहां सरकार को बड़ी उलझन में डाल दिया है वहीं जनरल सिंह के निर्धारित कार्यकाल के पूरा करने पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया। इस याचिका पर सुनवाई कब होगी यह तय नहीं है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जन्मतिथि 10 मई, 1950 माने जाने के फैसले को चुनौती देते हुए जनरल सिंह ने निजी हैसियत से सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया है। उनके वकील पुनीत बाली ने बताया कि सिंह ने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल की है। उन्होंने मांग की है कि उनकी जन्मतिथि दसवीं के प्रमाणपत्र के हिसाब से 10 मई, 1951 ही मानी जाए जो उनके सारे प्रमाणपत्रों और पुराने रिकार्ड में दर्ज है। साथ ही याचिका में सिंह ने अपनी यह बात भी दोहराई है कि जन्मतिथि का मामला उनकी निष्ठा और सम्मान से जुड़ा है। मालूम हो कि उनकी जन्मतिथि पर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए पहले से लंबित है। इस पर 20 जनवरी, 2012 को सुनवाई होनी है। |
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